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केरल का सीएम कौन होगा, कैसे होगा चुनाव? कांग्रेस प्रवक्ता ने बताया प्लान, BJP पर कसा तंज

 Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
 Published : May 05, 2026 05:57 pm IST,  Updated : May 05, 2026 07:02 pm IST

केरल में कांग्रेस गठबंधन वाली पार्टी यूडीएफ की सरकार बनेगी। अब केरल का सीएम कौन होगा, कब तक नाम फाइनल होगा, इसे लेकर क्या प्लान है, बताया कांग्रेस की प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने। साथ ही उन्होंने भाजपा पर तंज भी कसा।

कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद- India TV Hindi
कांग्रेस नेता शमा मोहम्मद Image Source : ANI

तिरुवनंतपुरम: केरल में कांग्रेस नीत गठबंधन यूडीएफ को जीत मिली है, नव निर्वाचित यूडीएफ सरकार के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के बारे में पूछे जाने पर कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने कहा, "...कांग्रेस पार्टी में एक निश्चित अनुशासन है। विधायकों की बैठक होगी, एक पर्यवेक्षक आएगा। विधायक आपस में, पर्यवेक्षक से और विभिन्न नेताओं से मिलेंगे। फिर यह मामला हाई कमांड के पास जाएगा और निर्णय लिया जाएगा। लोकप्रियता, वरिष्ठता, किसने मेहनत की है, इन सभी बातों को ध्यान में रखा जाएगा। यह भाजपा की तरह नहीं है जो दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान में हमने देखा है कि कठपुतलियों का चयन करती है। हम ऐसा नहीं करते..."


केरल में कांग्रेस की 63 सीटों पर जीत

केरल विधानसभा चुनाव में इस बार कांग्रेस 63 सीटों पर जीत दर्ज कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, वहीं यूडीएफ गठबंधन को स्‍पष्‍ट बहुमत मिल गया है। इस बार के चुनाव में  CPI(M) के नेतृत्‍व वाली एलडीएफ गठबंधन करारी हार का सामना करना पड़ा है और उसे 26 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा है। वहीं, चुनाव लड़ने वाली तीसरी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को 22 सीटें मिली हैं। CPI को 8, केरल कांग्रेस को 7, रिवल्‍यूशनरी सोशलिस्‍ट पार्टी को 3 और इसके साथ ही भाजपा ने भी तीन सीटें जीती हैं। 

पहली बार लेफ्ट सत्ता से बाहर

बता दें कि केरल में 140 सीट के लिए कुल 883 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था और राज्य की 140 विधानसभा सीटों के लिए बहुमत का आंकड़ा 71 है। इस बार के केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाला संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF), बीते दो कार्यकालों से सत्ता में  थी और इस बार के चुनाव में वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली थी। LDF की हार के साथ ही 1960 के दशक के बाद पहली बार ऐसा हुआ है कि जब वामपंथी दल किसी भी राज्य में अब सत्ता में नहीं होंगे।

 

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